quarta-feira, 8 de julho de 2015

1 यूहन्‍ना: MAITHILI


1 यूहन्‍ना 11जे शुरू सँ छल, जे हम सभ सुनने छी, जे हम सभ अपना आँखि सँ देखने छी, जे हम सभ ध्‍यानपूर्बक देखने छी और हाथ सँ छुने छी, अर्थात् ओ वचन जे जीवन अछि, से हमरा सभक विषय अछि। 2ई जीवन प्रगट भऽ गेल, हम सभ एकरा देखलहुँ, और एकरा बारे मे गवाही दैत हम सभ अहाँ सभक सामने ई जीवन प्रस्‍तुत करैत छी जे अनन्‍त अछि, जे पिताक संग छल और जे हमरा सभक सामने प्रगट कयल गेल। 3हम सभ जे देखलहुँ आ सुनलहुँ, से अहाँ सभ केँ कहि रहल छी, जाहि सँ अहूँ सभ केँ हमरा सभक संग संगति होयत। हमरा सभक संगति पिताक संग और हुनकर पुत्र यीशु मसीहक संग अछि। 4ई बात हम सभ एहि लेल लिखैत छी जाहि सँ हमरा सभक आनन्‍द पूर्ण होअय। 5जे सम्‍बाद हम सभ हुनका सँ सुनलहुँ और अहाँ सभ केँ सुनबैत छी से यैह अछि—परमेश्‍वर इजोत छथि। हुनका मे एको रत्ती अन्‍हार नहि छनि। 6जँ अपना सभ कहैत छी जे हुनका संग हमर संगति अछि जखन कि अन्‍हारे मे चलि रहल छी तँ झूठ बजैत छी और सत्‍यक अनुसार आचरण नहि करैत छी। 7मुदा जँ इजोत मे चलैत छी, जेना ओ इजोत मे छथि, तँ अपना सभ केँ एक-दोसराक संग संगति होइत अछि, और हुनकर पुत्र यीशुक खून अपना सभ केँ सभ पाप सँ शुद्ध करैत अछि। 8जँ अपना सभ कहैत छी जे हमरा मे कोनो पाप नहि अछि तँ अपना केँ धोखा दैत छी और अपना सभ मे सत्‍य नहि अछि। 9मुदा जँ अपना सभ अपन पाप केँ मानि लेब तँ ओ जे विश्‍वासयोग्‍य और न्‍यायी छथि अपना सभ केँ पापक क्षमा करताह और अपना सभ केँ सभ अधर्म सँ शुद्ध करताह। 10जँ अपना सभ कहैत छी जे हम पाप नहि कयने छी तँ परमेश्‍वर केँ झुट्ठा ठहरबैत छी, और हुनका वचन केँ अपना जीवन मे कोनो स्‍थान नहि दैत छी।

1 यूहन्‍ना 21यौ बौआ सभ, हम अहाँ सभ केँ ई बात एहि लेल लिखि रहल छी जे अहाँ सभ पाप नहि करी। मुदा जँ केओ पाप करय तँ अपना सभ केँ एक गोटे छथि जे पिता लग अपना सभक पक्ष मे विनती करैत छथि, अर्थात् यीशु मसीह, जे धार्मिक छथि। 2यीशु मसीह स्‍वयं ओ बलि छथि जिनका द्वारा अपना सभक पापक प्रायश्‍चित्त कयल गेल, और मात्र अपना सभक पापक नहि, बल्‍कि सौंसे संसारक सेहो। 3अपना सभ हुनका चिन्‍हैत छियनि से तखने जानि सकैत छी जखन हुनकर आज्ञाक पालन करैत छियनि। 4जे केओ कहैत अछि जे, हम हुनका चिन्‍हैत छियनि, मुदा हुनकर आज्ञाक पालन नहि करैत अछि, से झुट्ठा अछि और ओकरा मे सत्‍य नहि छैक। 5मुदा जे केओ हुनकर वचनक अनुसार चलैत अछि, तकरा मे परमेश्‍वरक प्रति ओकर प्रेम पूर्ण रूप सँ सिद्ध कयल गेल छैक। अपना सभ एहि सँ निश्‍चय जानि सकैत छी जे हुनका मे छी— 6जे केओ कहैत अछि जे, हम परमेश्‍वर मे रहैत छी, तकरा ओहने जीवन व्‍यतीत करबाक छैक जेहन यीशु व्‍यतीत कयलनि। 7प्रिय मित्र सभ, हम अहाँ सभ केँ कोनो नव आज्ञा नहि लिखि रहल छी। ई पुरान आज्ञा अछि, जे शुरुए सँ अहाँ सभक संग अछि। ई पुरान आज्ञा ओ वचन अछि जे अहाँ सभ सुनने छी। 8तैयो जे आज्ञा लिखि रहल छी से नवे अछि। ओ हुनका जीवन मे और अहूँ सभक जीवन मे सत्‍य प्रमाणित भेल अछि, कारण अन्‍हार दूर भऽ रहल अछि और वास्‍तविक इजोत एखने सँ चमकि रहल अछि। 9जे केओ कहैत अछि जे, हम इजोत मे छी, मुदा अपना भाय सँ घृणा करैत अछि, से एखनो अन्‍हारे मे अछि। 10जे केओ अपना भाय सँ प्रेम करैत अछि, से इजोत मे रहैत अछि, और ओकरा मे कोनो कारण नहि छैक जाहि सँ ठेस लगतैक। 11मुदा जे अपना भाय सँ घृणा करैत अछि से अन्‍हार मे अछि और अन्‍हारे मे चलैत अछि। ओ नहि जनैत अछि जे हम कतऽ जा रहल छी किएक तँ अन्‍हार ओकरा आन्‍हर बना देने छैक। 12प्रिय बौआ सभ, हम अहाँ सभ केँ ई बात एहि लेल लिखि रहल छी जे प्रभु यीशु मसीह द्वारा अहाँ सभक पाप माफ भऽ गेल अछि। 13यौ पिता लोकनि, हम अहाँ सभ केँ ई बात एहि लेल लिखि रहल छी जे अहाँ सभ तिनका जानि गेल छी जे शुरू सँ छथि। युवक सभ, हम अहाँ सभ केँ ई बात एहि लेल लिखि रहल छी जे अहाँ सभ दुष्‍ट शैतान केँ पराजित कयने छी। प्रिय बौआ सभ, हम अहाँ सभ केँ एहि लेल लिखने छी जे अहाँ सभ पिता केँ जानि गेल छी। 14यौ पिता लोकनि, हम अहाँ सभ केँ एहि लेल लिखने छी जे अहाँ सभ तिनका जानि गेल छी जे शुरू सँ छथि। युवक सभ, हम अहाँ सभ केँ एहि लेल लिखने छी जे अहाँ सभ बलवन्‍त छी, और परमेश्‍वरक वचन अहाँ सभ मे रहैत अछि, और अहाँ सभ दुष्‍ट शैतान केँ पराजित कयने छी। 15संसार सँ प्रेम नहि करू, और ने संसारक वस्‍तु सँ। जँ केओ संसार सँ प्रेम करैत अछि, तँ ओकरा मे पिताक प्रति प्रेम नहि छैक। 16कारण, जे किछु संसार मे छैक, अर्थात् मनुष्‍यक पापी स्‍वभावक इच्‍छा, ओकर आँखिक लालसा और धन-सम्‍पत्ति पर ओकर घमण्‍ड, से पिताक दिस सँ नहि, बल्‍कि संसारक दिस सँ अबैत अछि। 17संसार और जाहि कोनो बातक लेल ओकर इच्‍छा होइत छैक, से सभ समाप्‍त भऽ रहल अछि, मुदा जे व्‍यक्‍ति परमेश्‍वरक इच्‍छा पर चलैत अछि, से सदा-सर्वदा जीबैत रहत। 18प्रिय बौआ सभ, ई आब अन्‍तिम घड़ी अछि। अहाँ सभ सुनि लेने छी जे “मसीह-विरोधी” आबऽ वला अछि, और तहिना एखनो बहुत “मसीह-विरोधी” प्रगट भऽ गेल अछि। एहि सँ अपना सभ जानि सकैत छी जे ई अन्‍तिम घड़ी अछि। 19ओ सभ अपना सभ मे सँ निकलि गेल, मुदा वास्‍तव मे ओ सभ अपना सभक लोक नहि छल। जँ अपना सभक रहैत तँ अपना सभक संग रहले रहैत। मुदा ओकरा सभ केँ चलि गेला सँ ई स्‍पष्‍ट होइत अछि जे ओकरा सभ मे सँ केओ वास्‍तव मे अपना सभक नहि छल। 20मुदा ओ जे पवित्र छथि, से अहाँ सभ केँ अपन आत्‍मा देने छथि, और अहाँ सभ गोटे सत्‍य केँ जनैत छी । 21तेँ हम अहाँ सभ केँ एहि लेल नहि लिखि रहल छी जे अहाँ सभ सत्‍य केँ नहि जनैत छी, बल्‍कि एहि लेल जे अहाँ सभ सत्‍य केँ जनिते छी, और इहो जनैत छी जे कोनो झूठ सत्‍य सँ उत्‍पन्‍न नहि होइत अछि। 22और झुट्ठा के अछि? ओ वैह अछि जे एहि बात केँ अस्‍वीकार करैत अछि जे यीशु उद्धारकर्ता-मसीह छथि। ओहन आदमी “मसीह-विरोधी” अछि। ओ पितो केँ और पुत्रो केँ अस्‍वीकार करैत अछि। 23जे केओ पुत्र केँ अस्‍वीकार करैत अछि, तकरा लग पितो नहि छथिन। जे केओ पुत्र केँ स्‍वीकार करैत अछि, तकरा लग पितो छथिन। 24अहाँ सभ, जे बात शुरू मे सुनलहुँ, तकरा अपना मोन मे वास करऽ दिअ। जँ ओ अहाँ सभक मोन मे वास करत, तँ अहूँ सभ पुत्र मे और पिता मे वास करब। 25और ओ अपना सभ केँ जे बात प्रदान करबाक वचन देने छथि, से अछि अनन्‍त जीवन। 26हम अहाँ सभ केँ ई सभ बात तकरा सभक बारे मे लिखि रहल छी जे सभ अहाँ सभ केँ बहकाबऽ चाहैत अछि। 27मुदा जे पवित्र आत्‍मा अहाँ सभ केँ मसीह प्रदान कयलनि, से अहाँ सभ मे वास करैत छथि, और तेँ अहाँ सभ केँ आरो शिक्षकक कोनो आवश्‍यकता नहि अछि। कारण, हुनकर आत्‍मा अहाँ सभ केँ सभ बात सिखबैत छथि, और ओ आत्‍मा सत्‍य छथि, ओ झुट्ठा नहि छथि। जेना ओ अहाँ सभ केँ मसीह मे बनल रहबाक लेल सिखौने छथि तहिना हुनका मे बनल रहू। 28हँ, बौआ सभ, मसीह मे रहू, जाहि सँ ओ जहिया प्रगट होयताह तहिया अपना सभ स्‍थिर रहब और हुनकर आगमनक समय मे हुनका सँ मुँह नहि घुमाबऽ पड़त। 29अहाँ सभ जनैत छी जे ओ धार्मिक छथि, तँ इहो जानि लिअ जे, जे केओ धार्मिकताक आचरण करैत अछि, से परमेश्‍वरक सन्‍तान अछि।

1 यूहन्‍ना 31सोचू! पिता अपना सभ सँ कतेकटा प्रेम कयने छथि, जे अपना सभ परमेश्‍वरक सन्‍तान कहाबी! और वास्‍तव मे सैह छीहो। संसार अपना सभ केँ नहि चिन्‍हैत अछि, से एहि कारणेँ जे हुनको नहि चिन्‍हलकनि। 2प्रिय मित्र सभ, अपना सभ एखन परमेश्‍वरक सन्‍तान छी। और भविष्‍य मे की होयब, से एखन तक प्रगट नहि कयल गेल अछि। मुदा ई जनैत छी जे, मसीह जखन फेर औताह तखन अपना सभ हुनके जकाँ होयब, कारण हुनका ठीक ओहने देखबनि जेहन ओ छथि। 3जकरा हुनका सँ ई आशा छैक, से अपना केँ पवित्र रखैत अछि जेना ओ पवित्र छथि। 4जे केओ पाप करैत अछि से परमेश्‍वरक नियमक उल्‍लंघन करैत अछि, कारण पाप सैह अछि, अर्थात् परमेश्‍वरक नियमक उल्‍लंघन कयनाइ। 5मुदा अहाँ सभ जनैत छी जे मसीह पाप दूर करबाक लेल अयलाह, और हुनका मे कोनो पाप नहि छनि। 6जे हुनका मे वास करैत अछि, से पाप नहि करैत रहैत अछि। जे पाप करैत रहैत अछि, से ने हुनका देखने छनि आ ने हुनका चिन्‍हने छनि। 7यौ बौआ सभ! एहि विषय मे अहाँ सभ केँ केओ बहकाबओ नहि! जे केओ धार्मिकताक आचरण करैत रहैत अछि, सैह धार्मिक अछि जेना यीशु मसीह धार्मिक छथि। 8और जे केओ पापक आचरण करैत रहैत अछि, से शैतानक सन्‍तान अछि, कारण शैतान शुरुए सँ पाप करैत आयल अछि। परमेश्‍वरक पुत्र एहि लेल संसार मे अयलाह जे ओ शैतानक काज नष्‍ट करथि। 9जे केओ वास्‍तव मे परमेश्‍वरक सन्‍तान अछि से पाप नहि करैत रहत, कारण परमेश्‍वरक स्‍वभाव ओकरा मे रहैत छैक। ओ पापक आचरण नहि कऽ सकैत अछि, कारण ओ परमेश्‍वरक सन्‍तान भऽ गेल अछि। 10एही प्रकारेँ अपना सभ चिन्‍हि सकब जे परमेश्‍वरक सन्‍तान के अछि और शैतानक सन्‍तान के अछि—जे धार्मिकताक आचरण नहि करैत अछि से परमेश्‍वरक सन्‍तान नहि अछि, आ ने ओ जे अपना भाय सँ प्रेम नहि करैत अछि। 11जे सम्‍बाद अहाँ सभ शुरू सँ सुनने छी, से यैह अछि—अपना सभ एक-दोसर सँ प्रेम करी। 12काइन जकाँ नहि बनू, जे शैतानक छल और अपन भायक हत्‍या कयलक। ओ भायक हत्‍या किएक कयलक? एहि लेल, जे ओकर अपन काज अधलाह छलैक और ओकर भायक नीक छलैक। 13यौ भाइ सभ, जँ संसार अहाँ सभ सँ घृणा करैत अछि तँ एहि सँ आश्‍चर्यित नहि होउ। 14अपना सभ जनैत छी जे मृत्‍यु मे सँ निकलि कऽ जीवन मे पहुँचि गेल छी, कारण अपना भाय सभ सँ प्रेम करैत छी। जे केओ प्रेम नहि करैत अछि, से मृत्‍यु मे रहैत अछि। 15जे अपना भाय सँ घृणा करैत अछि से हत्‍यारा अछि और अहाँ सभ जनैत छी जे कोनो हत्‍यारा मे अनन्‍त जीवन वास नहि करैत छैक। 16प्रेम की अछि, से अपना सभ एहि सँ जनैत छी, जे प्रभु यीशु मसीह अपना सभक लेल अपन प्राण देलनि। और अपना सभ केँ सेहो अपन भाय सभक लेल अपन प्राण देबाक चाही। 17जँ ककरो संसारक सम्‍पत्ति छैक, और ओ अपना भाय केँ आवश्‍यकता मे देखैत छैक, मुदा ओकरा प्रति अपन हृदय कठोर कऽ लैत अछि, तँ ओकरा मे परमेश्‍वरक प्रेम कोना रहि सकैत छैक? 18प्रिय बौआ सभ, अपना सभ खाली शब्‍द वा बात द्वारा प्रेम नहि करी, बल्‍कि शुद्ध मोन सँ और काज द्वारा करी। 19तँ एहि प्रकारेँ अपना सभ जानि जायब जे अपना सभ सत्‍यक सन्‍तान छी। और एहि प्रकारेँ जखन-जखन अपना सभक मोन अपना सभ केँ दोषी ठहराओत, तखन-तखन अपना सभ अपन मोन केँ हुनका सामने शान्‍त कऽ सकब। कारण परमेश्‍वर अपना सभक मोन सँ पैघ छथि, और ओ सभ किछु जनैत छथि। 21प्रिय मित्र सभ, जँ अपना सभक मोन अपना सभ केँ दोषी नहि ठहरबैत अछि, तँ अपना सभ परमेश्‍वरक सामने साहस सँ आबि सकैत छी, 22और जे किछु हुनका सँ मँगबनि से प्राप्‍त करब, किएक तँ हुनकर आज्ञाक पालन करैत छियनि और वैह करैत छी जे हुनका प्रिय छनि। 23हुनकर आज्ञा ई अछि जे अपना सभ हुनकर पुत्र यीशु मसीह पर विश्‍वास करी, और जहिना ओ अपना सभ केँ आदेश देलनि तहिना एक-दोसर सँ प्रेम करी। 24जे केओ हुनकर आज्ञा सभक पालन करैत अछि, से हुनका मे रहैत अछि और ओ तकरा मे। ओ अपना सभ मे वास करैत छथि, से अपना सभ ओहि आत्‍मा द्वारा जनैत छी जे ओ अपना सभ केँ देने छथि।

1 यूहन्‍ना 41प्रिय मित्र सभ, ताहि सभ लोकक विश्‍वास नहि करू जे कहैत अछि जे हमरा मे परमेश्‍वरक आत्‍मा छथि, बल्‍कि ओकरा सभक जाँच करू, ई बुझबाक लेल जे ओकरा मे जे आत्‍मा छैक, से परमेश्‍वरक दिस सँ अछि वा नहि। किएक तँ बहुतो लोक संसार मे निकलि गेल अछि जे झूठ बाजि कऽ अपना केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता कहैत अछि। 2परमेश्‍वरक आत्‍मा केँ अहाँ सभ एहि तरहेँ चिन्‍हि सकैत छी—जे केओ स्‍वीकार करैत अछि जे यीशु मसीह मनुष्‍य बनि कऽ अयलाह, तकरा मे परमेश्‍वरक आत्‍मा छथि। 3मुदा जे केओ यीशु केँ एहि तरहेँ स्‍वीकार नहि करैत अछि, तकरा मे जे आत्‍मा अछि, से परमेश्‍वरक दिस सँ नहि अछि। ओकरा मे “मसीह-विरोधी”क आत्‍मा अछि, जकरा बारे मे अहाँ सभ सुनने छलहुँ जे आबऽ वला अछि, और एखनो ओ संसार मे आबि गेल अछि। 4प्रिय बौआ सभ, अहाँ सभ ओहि झुट्ठा शिक्षक सभ पर विजयी भऽ गेल छी, कारण अहाँ सभ परमेश्‍वरक छी, और जे अहाँ सभ मे छथि, से तकरा सँ शक्‍तिशाली छथि जे संसार मे अछि। 5ओ सभ संसारक अछि आ तेँ संसारेक बात कहैत अछि, और संसार ओकरा सभक बात सुनैत छैक। 6मुदा अपना सभ परमेश्‍वरक छी, और जे केओ परमेश्‍वर केँ चिन्‍हैत छनि, से अपना सभक सुनैत अछि। मुदा जे केओ परमेश्‍वरक नहि अछि से अपना सभक नहि सुनैत अछि। एहि सँ अपना सभ सत्‍यक आत्‍मा और झूठक आत्‍मा चिन्‍हि सकैत छी। 7प्रिय मित्र सभ, अपना सभ एक-दोसर सँ प्रेम करी, किएक तँ प्रेम परमेश्‍वर सँ उत्‍पन्‍न होइत अछि। जे प्रेम करैत अछि, से परमेश्‍वरक सन्‍तान अछि और परमेश्‍वर केँ चिन्‍हैत अछि। 8जे प्रेम नहि करैत अछि, से परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हैत अछि, किएक तँ परमेश्‍वर प्रेम छथि। 9परमेश्‍वर अपन प्रेम अपना सभक बीच एहि प्रकारेँ प्रगट कयलनि—ओ अपन एकलौता पुत्र केँ संसार मे पठा देलनि जाहि सँ अपना सभ हुनका द्वारा जीवन प्राप्‍त करी। 10प्रेमक अर्थ ई नहि, जे अपना सभ परमेश्‍वर सँ प्रेम कयलियनि, बल्‍कि ई, जे ओ अपना सभ सँ प्रेम कयलनि और अपन पुत्र केँ अपना सभक पापक प्रायश्‍चित्त करऽ वला बलि बना कऽ पठा देलनि। 11प्रिय मित्र सभ, जँ परमेश्‍वर अपना सभ सँ एहन प्रेम कयलनि, तँ अपनो सभ केँ एक-दोसर सँ प्रेम करबाक चाही। 12परमेश्‍वर केँ केओ कहियो नहि देखने छनि, मुदा अपना सभ जँ एक-दोसर सँ प्रेम करैत छी तँ ओ अपना सभ मे वास करैत छथि और अपना सभ मे हुनकर प्रेम सिद्ध होइत अछि। 13अपना सभ हुनका मे रहैत छी और ओ अपना सभ मे, तकर प्रमाण ई भेल जे ओ अपना सभ केँ अपन आत्‍मा मे सहभागी बना लेने छथि। 14अपना सभ देखने छी और गवाही दैत छी जे पिता अपना पुत्र केँ संसारक उद्धारकर्ताक रूप मे पठौलनि। 15जँ केओ स्‍वीकार करैत अछि जे यीशु परमेश्‍वरक पुत्र छथि, तँ परमेश्‍वर ओकरा मे रहैत छथि और ओ परमेश्‍वर मे। 16परमेश्‍वरक प्रेम जे अपना सभक प्रति छनि, तकरा अपना सभ जानि गेल छी और ताही पर भरोसा करैत छी। परमेश्‍वर प्रेम छथि। जे केओ प्रेम मे रहैत अछि से परमेश्‍वर मे रहैत अछि, और परमेश्‍वर ओकरा मे। 17अपना सभ मे प्रेम सिद्ध होयबाक उद्देश्‍य ई अछि जे अपना सभ न्‍यायक दिन मे निर्भय रही, और एहि कारण निर्भय रही जे संसार मे अपना सभ तेहन छी जेहन यीशु छथि। 18प्रेम मे डर नहि होइत अछि। सिद्ध प्रेम डर केँ भगा दैत अछि, कारण डर दण्‍ड सँ सम्‍बन्‍धित अछि। जे डेराइत अछि, से प्रेम मे सिद्ध नहि भेल अछि। 19अपना सभ एहि लेल प्रेम करैत छी जे ओ पहिने अपना सभ सँ प्रेम कयलनि। 20जँ केओ कहैत अछि जे, हम परमेश्‍वर सँ प्रेम करैत छी, जखन कि अपना भाय सँ घृणा करैत अछि, तँ ओ झूठ बाजऽ वला अछि। कारण, जे अपना भाय सँ जकरा ओ देखने छैक प्रेम नहि करैत अछि, से परमेश्‍वर सँ जिनका ओ नहि देखने छनि कोना प्रेम कऽ सकैत अछि? 21और ओ अपना सभ केँ ई आज्ञा देने छथि जे, जे परमेश्‍वर सँ प्रेम करैत अछि से अपना भाय सँ सेहो प्रेम करय।

1 यूहन्‍ना 51जे केओ विश्‍वास करैत अछि जे यीशुए उद्धारकर्ता-मसीह छथि, से परमेश्‍वरक सन्‍तान अछि, और जे केओ पिता सँ प्रेम करैत छनि, से हुनकर सन्‍तानो सँ प्रेम करैत छैक। 2अपना सभ जँ परमेश्‍वर सँ प्रेम करैत छी और हुनकर आज्ञा सभक पालन करैत छी तँ एहि सँ ई जानि सकैत छी जे परमेश्‍वरक सन्‍तान सभ सँ प्रेम करैत छी। 3परमेश्‍वर सँ प्रेम कयनाइ ई अछि—हुनकर आज्ञा सभक पालन कयनाइ। हुनकर आज्ञा सभ कठिन नहि अछि, 4कारण, जे केओ परमेश्‍वरक सन्‍तान अछि, से संसार पर विजय प्राप्‍त कयने अछि। ओ विजय जे संसार केँ पराजित करैत अछि, से अपना सभक विश्‍वासे अछि। 5संसार पर विजय के प्राप्‍त कऽ सकैत अछि? खाली वैह जे विश्‍वास करैत अछि जे यीशु परमेश्‍वरक पुत्र छथि। 6यीशु मसीह वैह छथि जे जल और खून द्वारा प्रगट भेलाह। ओ मात्र जले द्वारा नहि, बल्‍कि जल और खून दूनू द्वारा प्रगट भेलाह। और एकर गवाह पवित्र आत्‍मा छथि, कारण ओ आत्‍मा सत्‍य छथि। 7एहि तरहेँ तीनटा अछि जे गवाही दैत अछि— 8परमेश्‍वरक आत्‍मा, जल और खून, और तीनू सहमत अछि। 9अपना सभ मनुष्‍यक गवाही मानि लैत छी, तँ परमेश्‍वरक गवाही ओहि सँ कतेक पैघ अछि, और ई गवाही परमेश्‍वर स्‍वयं अपना पुत्रक विषय मे देने छथि। 10जे केओ परमेश्‍वरक पुत्र पर विश्‍वास करैत अछि, तकरा हृदय मे ई गवाही रहैत छैक। जे केओ परमेश्‍वरक बात नहि मानैत अछि, से हुनका झुट्ठा ठहरबैत छनि, कारण ओ ओहि गवाहीक विश्‍वास नहि कयलक जे परमेश्‍वर अपना पुत्रक विषय मे देने छथि। 11ओ गवाही ई अछि जे परमेश्‍वर अपना सभ केँ अनन्‍त जीवन देने छथि, और ई जीवन हुनकर पुत्र मे भेटैत अछि। 12जकरा ककरो मे परमेश्‍वरक पुत्र छथिन, तकरा मे जीवन छैक, और जकरा ककरो मे परमेश्‍वरक पुत्र नहि छथिन, तकरा मे जीवन नहि छैक। 13अहाँ सभ केँ, जे परमेश्‍वरक पुत्रक नाम पर विश्‍वास करैत छी, हम ई सभ बात लिखि रहल छी जाहि सँ अहाँ सभ जानी जे अहाँ सभ केँ अनन्‍त जीवन अछि। 14अपना सभ परमेश्‍वरक सामने मे साहस सँ आबि सकैत छी, कारण अपना सभक पूर्ण विश्‍वास अछि जे, जँ हुनकर इच्‍छाक अनुसार किछु मँगैत छियनि तँ ओ अपना सभक प्रार्थना सुनैत छथि। 15और जँ ई जनैत छी जे ओ अपना सभक प्रार्थना सुनैत छथि, चाहे जे किछु मँगियनि, तँ इहो निश्‍चय जनैत छी जे, जे किछु हुनका सँ मँगने छी, से अपना सभ केँ प्राप्‍त भऽ गेल अछि। 16जँ केओ अपना भाय केँ एहन पाप करैत देखत जकर परिणाम मृत्‍यु नहि होइक, तँ ओ प्रार्थना करय, और ओ जे पाप कयलक, तकरा परमेश्‍वर जीवन देथिन। हम तकरे सभक बारे मे कहैत छी जे एहन पाप करैत अछि जकर परिणाम मृत्‍यु नहि छैक। किएक तँ एहनो पाप होइत अछि जकर परिणाम मृत्‍यु छैक। हम नहि कहैत छी जे ओहि सम्‍बन्‍ध मे प्रार्थना कयल जाय। 17सभ गलत काज तँ पाप अछि, मुदा एहनो पाप होइत अछि जकर परिणाम मृत्‍यु नहि छैक। 18अपना सभ जनैत छी जे, जे केओ परमेश्‍वर सँ उत्‍पन्‍न भेल अछि, से पाप नहि करैत रहैत अछि। परमेश्‍वरक पुत्र ओकरा सुरक्षित रखैत छथिन, और शैतान ओकरा छुबि नहि सकैत छैक। 19अपना सभ जनैत छी जे परमेश्‍वरक सन्‍तान छी और सौंसे संसार शैतानक वश मे अछि। 20अपना सभ इहो जनैत छी जे परमेश्‍वरक पुत्र आयल छथि और अपना सभ केँ बुझबाक सामर्थ्‍य देने छथि जाहि सँ अपना सभ सत्‍य परमेश्‍वर केँ चिन्‍हि सकी। अपना सभ सत्‍य परमेश्‍वर मे छी, किएक तँ हुनकर पुत्र यीशु मसीह मे छी। यैह सत्‍य परमेश्‍वर और अनन्‍त जीवन छथि। 21प्रिय बौआ सभ, अपना केँ झुट्ठा-देवता सभ सँ बचा कऽ राखू।

http://www.bible.is/MAIWBT/1John/1/D

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